Supreme Court ने स्कूलों में Transgender-Inclusive यौन शिक्षा के लिए याचिका पर जवाब मांगा
Supreme Court ने स्कूल के पाठ्यक्रम में ट्रांसजेंडर-समावेशी व्यापक यौन शिक्षा (transgender-inclusive comprehensive sexuality education) को एकीकृत करने की याचिका के संबंध में केंद्र और NCERT से जवाब मांगा है। एक 16 वर्षीय छात्र द्वारा दायर याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 2014 के NALSA फैसले और Transgender Persons Act 2019 के बावजूद, लैंगिक पहचान और विविधता पर शैक्षिक मॉड्यूल काफी हद तक अनुपस्थित हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि ये चूक समानता के अधिकार और Directive Principles of State Policy का उल्लंघन करती हैं। कई राज्यों में पाठ्यपुस्तकों के सर्वेक्षण में प्रणालीगत चूक का खुलासा हुआ, जिसमें केरल आंशिक अपवाद था।
मुख्य बिंदु
- याचिका देश भर के स्कूल पाठ्यक्रमों में ट्रांसजेंडर-समावेशी यौन शिक्षा के एकीकरण की मांग करती है।
- यह 2014 के NALSA v Union of India फैसले का हवाला देती है जिसने इस तरह के समावेश को अनिवार्य किया था।
- याचिका में NCERT और SCERTs द्वारा लैंगिक पहचान और विविधता पर मॉड्यूल शामिल करने में विफलता का आरोप लगाया गया है।
- तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में पाठ्यपुस्तक समीक्षाओं ने ट्रांसजेंडर दृष्टिकोणों की प्रणालीगत चूक का खुलासा किया।
परीक्षा तथ्य
- National Legal Services Authority (NALSA) v Union of India (2014)
- Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019
- Transgender Persons Act की Sections 2(d) और 13
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