चुनाव आयोग को मतदाता सूची में हेरफेर और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर जांच का सामना करना पड़ रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों के कारण दबाव है, विशेष रूप से कर्नाटक और बिहार में, जहां एक Special Intensive Revision (SIR) के कारण मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट आई। विपक्ष ने Election Commissioners की नियुक्ति के नए कानून की भी आलोचना की, यह तर्क देते हुए कि यह चयन समिति में सरकार को 2:1 बहुमत देकर असहमति को कम करता है। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया, EC को हटाए गए मतदाताओं की विस्तृत सूची कारणों सहित प्रकाशित करने और Aadhaar को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया। प्रवासी मतदाताओं की मतदान करने की क्षमता और मशीन-पठनीय मतदाता सूचियों की कमी के बारे में चिंताएं बनी हुई हैं, जिससे EC की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर सवाल उठते हैं।

मुख्य बिंदु

  • भारत निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, विशेष रूप से महादेवनगर (कर्नाटक) में और बिहार में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान।
  • Election Commissioners की नियुक्ति का नया कानून विवादास्पद है, आलोचकों का तर्क है कि यह चयन समिति में सरकारी बहुमत सुनिश्चित करके EC की स्वतंत्रता से समझौता करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने EC को हटाए गए मतदाताओं की विस्तृत, बूथ-वार सूची विशिष्ट कारणों सहित प्रदान करने और Aadhaar को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।
  • साइबर-सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मशीन-पठनीय मतदाता सूचियां प्रदान करने से EC का इनकार विवाद का विषय बना हुआ है।
  • ये मुद्दे प्रवासी मतदाताओं के लिए चुनौतियों को उजागर करते हैं और सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी और सुलभ चुनावी प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

परीक्षा तथ्य

  • EC का जनादेश संविधान के Article 324 से प्राप्त होता है, जिसमें चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण शामिल है।
  • Chief Election Commissioner और अन्य Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023, EC नियुक्तियों को नियंत्रित करता है।
  • ECs के लिए चयन समिति में Prime Minister, एक Union Minister और Leader of the Opposition शामिल होते हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR प्रक्रिया के संबंध में 14 अगस्त को एक अंतरिम आदेश जारी किया।

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