भू-राजनीतिक बदलाव और U.S.-ईरान तनाव भारत के बहुध्रुवीय विश्व दृष्टिकोण और महान शक्ति की स्थिति को खतरे में डालते हैं
लेख में चर्चा की गई है कि U.S. राष्ट्रपति Trump के दावों के बावजूद, U.S.-इजरायल-ईरान युद्ध की संभावना एक खतरा बनी हुई है, जो इजरायली राजनीति और neoconservative प्रभाव से प्रेरित है। ऐसा संघर्ष भारत के आर्थिक हितों और उसकी 'महान शक्ति' की महत्वाकांक्षाओं के लिए विनाशकारी होगा, जिससे पश्चिम एशिया में U.S.-नेतृत्व वाली unipolarity मजबूत होगी और भारत की रणनीतिक पदचिह्न कमजोर होगी। यह दिल्ली के बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के दृष्टिकोण से टकराता है। ऊर्जा के विविध स्रोतों पर भारत की निर्भरता और पश्चिम एशिया के विभिन्न राज्यों के साथ उसका जुड़ाव खतरे में पड़ जाएगा। लेखक का तर्क है कि भारत को U.S. से ईरान को सहन करने और वैश्विक multipolarity को स्वीकार करने का आग्रह करना चाहिए, इस बात पर जोर देते हुए कि यह लंबी अवधि में U.S. की सुरक्षा और आर्थिक हितों के साथ संरेखित है।
मुख्य बिंदु
- U.S.-इजरायल-ईरान संघर्ष की संभावित स्थिति भारत के आर्थिक हितों और 'महान शक्ति' के दर्जे की उसकी आकांक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा है।
- ऐसा संघर्ष पश्चिम एशिया में U.S.-नेतृत्व वाली unipolarity को जन्म दे सकता है, जो भारत के बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के दृष्टिकोण के विपरीत है।
- भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और विविध भागीदारों के साथ जुड़ने की क्षमता कमजोर हो जाएगी।
- लेख में सुझाव दिया गया है कि भारत को ईरान के प्रति U.S. की सहिष्णुता और वैश्विक multipolarity की स्वीकृति की वकालत करनी चाहिए।
परीक्षा तथ्य
- लेखक: Kadira Pethiyagoda, University of Melbourne में भू-राजनीति विशेषज्ञ।
- भारत के External Affairs Minister ने Moscow यात्रा के दौरान 'बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण' पर चर्चा की।
- INS Tamal, रूस द्वारा निर्मित एक युद्धपोत, को भारत द्वारा कमीशन किया गया था।
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