जल और ऊर्जा निष्कर्षण जैसी मानवीय गतिविधियाँ प्रेरित भूकंपों के जोखिम को बढ़ाती हैं
लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि खनन, भूजल निष्कर्षण, बांधों के पीछे पानी जमा करना और जमीन में तरल पदार्थ डालना जैसी मानवीय गतिविधियाँ भूकंपीय गतिविधि को प्रेरित कर सकती हैं, जिससे मानव-प्रेरित भूकंप आते हैं। ये गतिविधियाँ tectonic plates के बीच तनाव संचय का कारण बनती हैं। 2021 के एक अध्ययन ने National Capital Region में उथले भूकंपों को अत्यधिक भूजल निष्कर्षण से जोड़ा। Koyna hydroelectric dam जैसे बड़े बांधों को भी महत्वपूर्ण भूकंपों से जोड़ा गया है। भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग, जो जलविद्युत और तेल/गैस निष्कर्षण (fracking सहित) के माध्यम से पूरी होती है, इस जोखिम को और बढ़ाती है। वैज्ञानिकों ने भूजल के वैज्ञानिक प्रबंधन, बांध निर्माण से पहले उचित मूल्यांकन और इन गतिविधियों की निगरानी के लिए मजबूत भूकंपीय नेटवर्क की आवश्यकता पर जोर दिया है।
मुख्य बिंदु
- भूजल निष्कर्षण, बांध निर्माण और ऊर्जा निष्कर्षण जैसी मानवीय गतिविधियाँ भूकंपों को प्रेरित कर सकती हैं।
- ये गतिविधियाँ पृथ्वी की पपड़ी में तनाव व्यवस्था को बदल देती हैं, जिससे भूकंपीय घटनाएँ होती हैं।
- उदाहरणों में दिल्ली-NCR में भूजल की कमी और Koyna dam से जुड़े भूकंप शामिल हैं।
- संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन, उचित पर्यावरणीय आकलन और मजबूत भूकंपीय निगरानी इन जोखिमों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- जलवायु परिवर्तन जल लोडिंग प्रक्रियाओं को प्रभावित करके अप्रत्यक्ष रूप से भूकंप की आवृत्ति को प्रभावित कर सकता है।
परीक्षा तथ्य
- पिछले 150 वर्षों में दुनिया भर में 700 से अधिक मानव-प्रेरित भूकंप दर्ज किए गए।
- Scientific Reports में 2021 के एक अध्ययन ने दिल्ली-NCR भूकंपों को भूजल निष्कर्षण से जोड़ा।
- 1967 में Koynanagar भूकंप (महाराष्ट्र) का 6.3 परिमाण Koyna dam में जल अधिभार के कारण बताया गया था।
- भारत में छह राज्यों में 56 fracking स्थल हैं।
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