अमेरिकी प्रतिबंधों की धमकी के बीच रूसी तेल पर 'दोहरे मापदंड' के खिलाफ भारत की चेतावनी
अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% शुल्क लगाने वाले विधेयक पर विचार करने और NATO द्वारा रूस के साथ व्यापार जारी रखने के खिलाफ चेतावनी देने के बीच भारत ने "दोहरे मापदंड" के खिलाफ आगाह किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करना भारत के लिए एक "सर्वोच्च प्राथमिकता" है, जो बाजार प्रस्तावों और वैश्विक परिस्थितियों द्वारा निर्देशित है। भारत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यूरोपीय संघ के सदस्य रूसी तेल और गैस की खरीद जारी रखे हुए हैं, और रूसी अल्पसंख्यक नियंत्रण वाली भारतीय रिफाइनरियों से प्रसंस्कृत उत्पादों के प्रमुख खरीदार हैं। पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Puri ने कहा कि भारत ने अपने तेल आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर लगभग 40 देशों तक पहुंचाया है। यह ऊर्जा सुरक्षा की जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता को रेखांकित करता है।
मुख्य बिंदु
- रूसी तेल खरीदना जारी रखने के लिए भारत को संभावित 500% अमेरिकी शुल्क और NATO की धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
- भारत बाजार प्रस्तावों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के अपने संप्रभु अधिकार पर जोर देता है।
- भारत पश्चिमी देशों, विशेष रूप से EU सदस्यों के पाखंड की ओर इशारा करता है, जो रूसी ऊर्जा का आयात जारी रखे हुए हैं।
- भारत ने प्रतिबंधों से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए अपने तेल आयात स्रोतों में काफी विविधता लाई है।
- यह मुद्दा ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की जटिल भू-राजनीतिक गतिशीलता को रेखांकित करता है।
परीक्षा तथ्य
- 'Sanctioning Russia Act of 2025' अमेरिकी कांग्रेस में पेश किए जाने की उम्मीद है।
- भारत ने अपने तेल आपूर्ति स्रोतों को 27 से बढ़ाकर लगभग 40 देशों तक पहुंचाया है।
- रूस अपने तेल का लगभग 38% भारत को (फरवरी 2025 तक) और लगभग 6% EU देशों को निर्यात करता है।
- भारत ने पहले Trump प्रशासन के दबाव में 2017 में ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था।
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