संयुक्त राष्ट्र में नियमों पर आधारित व्यवस्था के लिए भारत का जोर मजबूत वैश्विक नेतृत्व का संकेत देता है
भारत के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक सुधारवादी और समावेशी बहुपक्षीय प्रणाली की आवश्यकता को दोहराया, जिसमें विभाजन के बजाय संवाद, विकास और विश्वास पर जोर दिया गया। भारत ने अधिक प्रतिनिधि वाले संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता पर प्रकाश डाला, और Global South के लिए बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए Security Council में स्थायी और अस्थायी सीटों के विस्तार का आह्वान किया। इसके अलावा, भारत ने सतत विकास, जलवायु कार्रवाई और संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और international law को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
मुख्य बिंदु
- भारत के प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में विभाजन से संवाद और सहयोग की ओर बढ़ने पर जोर दिया।
- भारत ने Global South का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए UN Security Council में व्यापक सुधारों का आह्वान किया।
- देश ने सतत विकास, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक शांति व सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
- भारत संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और international law के सम्मान पर आधारित नियमों-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन करता है।
परीक्षा तथ्य
- ये बयान United Nations General Assembly (UNGA) के 80वें सत्र में दिए गए थे।
- प्रकाशन की तिथि 24 सितंबर, 2026 है।
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