AI कीमतें गिर रही हैं लेकिन फर्में अधिक खर्च कर रही हैं

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अर्थशास्त्र बदल रहा है क्योंकि ओपन-वेट मॉडल्स की लागत कम हो रही है, जिससे उद्यमों (enterprises) के बीच इसे व्यापक रूप से अपनाए जाने को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि फाउंडेशनल मॉडल इन्फेरेंस की लागत में काफी गिरावट आई है—कुछ मामलों में LLM इन्फेरेंस की कीमतें लगभग 90% तक गिर गई हैं—लेकिन कंपनियां अपना कुल खर्च बढ़ा रही हैं। किसी एक महंगे फ्रंटियर मॉडल पर पूरी तरह से निर्भर रहने के बजाय, फर्में अलग-अलग कार्यों के लिए विविध मॉडलों का उपयोग कर रही हैं, जिससे टोकन की खपत अधिक हो रही है और अधिक जटिल एजेंटिक वर्कफ़्लो (agentic workflows) बन रहे हैं। हालांकि, इस बदलाव से वास्तविक व्यावसायिक मूल्य बनाम कच्चे टोकन की खपत को मापने को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और AI के उपयोग की कम्प्यूटेशनल तीव्रता बढ़ गई है।

मुख्य बिंदु

  • ओपन-वेट मॉडल्स की लागत में भारी कमी आई है, जिससे AI को अपनाना अधिक सुलभ हो गया है।
  • घटती टोकन कीमतों के बावजूद, बढ़े हुए उपयोग और जटिल मल्टी-मॉडल वर्कफ़्लो के कारण उद्यम AI पर अधिक खर्च कर रहे हैं।
  • ओपन-वेट मॉडल अब टोकन के उपयोग में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं, जो मालिकाना (proprietary) वर्चस्व को चुनौती दे रहा है।
  • एजेंटिक वर्कफ़्लो और मल्टी-मॉडल तैनाती की ओर बदलाव से कुल कम्प्यूटेशनल तीव्रता और खर्च में वृद्धि होती है।

परीक्षा तथ्य

  • नवंबर 2022 और अक्टूबर 2024 के बीच LLM इन्फेरेंस की कीमतों में 90% से अधिक की गिरावट आई।
  • कुछ प्लेटफॉर्मों पर ओपन-वेट मॉडल टोकन उपयोग का लगभग 35% हिस्सा रखते हैं।

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