भोपाल गैस त्रासदी स्थल: 68% पानी के नमूने सीवेज से दूषित
भोपाल में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी से प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक निकाय द्वारा आपूर्ति किए गए 68% पीने के पानी के नमूने faecal coliform से दूषित थे। 30 इलाकों से लिए गए 63 नमूनों में से 43 में सीवेज संदूषण पाया गया। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यह स्थिति इंदौर के भागीरथपुरा के समान है, जहां दूषित पानी से 35 से अधिक मौतें हुई थीं। उन्होंने दावा किया कि शहर की ऊपरी झील के 90% और कोलार बांध के 25% नमूने भी दूषित थे। हालांकि, भोपाल नगर निगम (BMC) ने कहा कि जुलाई में उसके अपने परीक्षणों में 61 नमूनों में कोई अशुद्धता नहीं पाई गई।
मुख्य बिंदु
- कार्यकर्ताओं ने बताया कि भोपाल गैस त्रासदी स्थल के पास पीने के पानी के 68% नमूने faecal coliform से दूषित थे।
- यह संदूषण स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, जो इंदौर में इसी तरह की घटना के समानांतर है जिसके कारण कई मौतें हुईं।
- कार्यकर्ताओं ने भोपाल की ऊपरी झील और कोलार बांध से पानी में उच्च संदूषण दरों का भी दावा किया।
- भोपाल नगर निगम (BMC) ने इन निष्कर्षों का खंडन किया, जिसमें कहा गया कि उसके परीक्षणों में कोई अशुद्धता नहीं पाई गई।
परीक्षा तथ्य
- स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश।
- घटना: 1984 भोपाल गैस त्रासदी स्थल।
- दूषित पदार्थ: Faecal coliform।
- नमूनों की संख्या: 63 (43 दूषित)।
- तुलना: इंदौर की Bhagirathpura घटना (दिसंबर 2025-जनवरी 2026, 35+ मौतें)।
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