FY24 में निजी R&D खर्च पहली बार सरकारी खर्च से अधिक हुआ
भारत का Gross Expenditure on Research and Development (GERD) 2021-22 में GDP का 0.83% तक पहुंच गया, जो 2009-10 के बाद सबसे अधिक है। एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव देखा गया है, जिसमें राष्ट्रीय R&D खर्च में निजी उद्योग का योगदान पहली बार सरकारी खर्च से अधिक हो गया है, जो 2023-24 में 51.8% तक पहुंच गया है। यह 2020-21 में 36.4% से काफी वृद्धि दर्शाता है। कुल GERD 2020-21 में ₹1.27 लाख करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹2.45 लाख करोड़ हो गया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी यह डेटा भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालता है, जो उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के रुझानों के अनुरूप है जहां व्यवसाय आमतौर पर अनुसंधान व्यय का 70% से अधिक हिस्सा होते हैं।
मुख्य बिंदु
- भारत का Gross Expenditure on Research and Development (GERD) 2021-22 में GDP का 0.83% तक पहुंच गया, जो 2009-10 के बाद सबसे अधिक है।
- FY24 में राष्ट्रीय R&D खर्च में निजी उद्योग का हिस्सा पहली बार सरकारी खर्च से अधिक हो गया, जो 51.8% तक पहुंच गया।
- कुल GERD 2020-21 में ₹1.27 लाख करोड़ से लगभग दोगुना होकर 2023-24 में ₹2.45 लाख करोड़ हो गया।
- यह बदलाव एक परिपक्व नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को इंगित करता है, जिसमें अनुसंधान में निजी क्षेत्र की अधिक प्रमुख भूमिका है।
परीक्षा तथ्य
- 2021-22 में GERD: GDP का 0.83%।
- 2023-24 में निजी उद्योग का हिस्सा: 51.8%।
- 2023-24 में कुल GERD: ₹2.45 लाख करोड़।
- डेटा स्रोत: Department of Science and Technology (DST) अपने National Science and Technology Management Information System (NSTMIS) के माध्यम से।
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