सूखे मानसून और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से भारत का लचीलापन परखा गया
भारत सूखे मानसून के कारण लचीलेपन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा का सामना कर रहा है, जिसमें कई राज्यों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों को प्रभावित कर रही है। यह लेख बताता है कि देश के 77% जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई, जिससे खरीफ फसलें प्रभावित हुईं और खाद्य सुरक्षा तथा ग्रामीण आजीविका के बारे में चिंताएँ बढ़ गईं। जलवायु परिवर्तन इन चुनौतियों को बढ़ा रहा है, जिससे अधिक बार और तीव्र चरम मौसम की घटनाएँ हो रही हैं। सरकार का 'environmental accounting' और जल संरक्षण प्रयासों पर ध्यान महत्वपूर्ण है, लेकिन कमजोर आबादी की रक्षा करने और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जलवायु अनुकूलन, टिकाऊ कृषि और आपदा तैयारी के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- भारत एक सूखे मानसून के मौसम का अनुभव कर रहा है, जिसमें अधिकांश जिलों में महत्वपूर्ण वर्षा की कमी है।
- सूखा कृषि, विशेष रूप से खरीफ फसलों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को खतरा होता है।
- जलवायु परिवर्तन चरम मौसम की घटनाओं को तेज कर रहा है, जिससे भारत सूखे और बाढ़ के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।
- 'environmental accounting' और जल संरक्षण जैसी सरकारी पहल महत्वपूर्ण हैं लेकिन व्यापक जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की आवश्यकता है।
- दीर्घकालिक लचीलेपन के लिए टिकाऊ कृषि, आपदा तैयारी और कमजोर आबादी के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है।
परीक्षा तथ्य
- भारत के 77% जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई।
- 'environmental accounting' के ढाँचे का उल्लेख किया गया है।
- लेख में Ministry of Earth Sciences का उल्लेख है।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
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