भारत के अपर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम और गैस भंडार उजागर हुए, जिससे भेद्यता बढ़ी
केंद्र ने हाल ही में खुदरा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाईं, जिससे भारत की अपर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम और गैस भंडार के कारण उसकी भेद्यता उजागर हुई। 2018 से उच्च कच्चे तेल की कीमतों के बारे में चेतावनियों के बावजूद, भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां घाटे में चल रही हैं। देश की आयात निर्भरता, विशेष रूप से कच्चे तेल के लिए, बढ़ गई है, जिसमें भंडार केवल 20 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है, जबकि चीन के पास 900 मिलियन बैरल हैं। लेख सरकार की पर्याप्त भंडार बनाने और स्रोतों में विविधता लाने में विफलता की आलोचना करता है, जिससे भारत वैश्विक मूल्य झटकों और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशील हो गया है।
मुख्य बिंदु
- भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम और गैस भंडार अपर्याप्त हैं, जिससे देश वैश्विक मूल्य झटकों के प्रति संवेदनशील हो गया है।
- उच्च कच्चे तेल की कीमतों और अपर्याप्त भंडार के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा है।
- भारत के वर्तमान भंडार केवल लगभग 20 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त हैं, जो चीन के 900 मिलियन बैरल से काफी कम है।
- पर्याप्त भंडार बनाने और स्रोतों में विविधता लाने में सरकार की विफलता ने भारत को भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति उजागर कर दिया है।
- पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हालिया वृद्धि इस भेद्यता को दूर करने की तात्कालिकता को रेखांकित करती है।
परीक्षा तथ्य
- केंद्र ने हाल ही में खुदरा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ाईं।
- भारत के भंडार लगभग 20 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त हैं।
- चीन के रणनीतिक भंडार लगभग 900 मिलियन बैरल हैं।
- लेख में 1973 के तेल संकट का उल्लेख है।
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