विभाजन को पाटना: एक समर्पित Indian Scientific Service (ISS) का मामला
भारत की प्रशासनिक व्यवस्था, जिसमें generalist नौकरशाहों का दबदबा है, अक्सर नीति निर्माण में वैज्ञानिक विशेषज्ञता को एकीकृत करने में विफल रहती है। हालांकि वैज्ञानिक विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन उनके पास करियर की प्रगति और अधिकार के लिए एक विशेष ढांचे की कमी है, और वे सामान्य प्रशासन के लिए बनाए गए नियमों से बंधे हुए हैं। प्रस्तावित Indian Scientific Service (ISS) एक स्थायी, all-India cadre होगा जिसे कठोर चयन के माध्यम से भर्ती किया जाएगा। यह सेवा स्वतंत्र वैज्ञानिक इनपुट प्रदान करेगी, मूल्यांकन में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी और भारत को जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और उभरती प्रौद्योगिकियों की जटिल चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी। अपनी औपनिवेशिक प्रशासनिक विरासत से आगे बढ़कर, भारत भविष्य के लिए एक अधिक लचीला, साक्ष्य-आधारित शासन ढांचा तैयार कर सकता है।
मुख्य बिंदु
- भारत में वैज्ञानिक शासन के लिए एक विशेष ढांचे की कमी है, जबकि कई उन्नत देशों में समर्पित वैज्ञानिक कैडर मौजूद हैं।
- सरकार में वर्तमान वैज्ञानिक भूमिकाएं अक्सर सलाहकार या तदर्थ (ad-hoc) होती हैं, जिनमें शासन के भीतर उनकी भूमिका को परिभाषित करने के लिए संरचनात्मक सुधार की कमी है।
- प्रस्तावित ISS में पर्यावरण, समुद्री विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष कैडर शामिल होंगे।
- एक समर्पित कैडर यह सुनिश्चित करेगा कि नीतिगत निर्णय राजनीतिक सुविधा या प्रशासनिक दिनचर्या के बजाय साक्ष्यों द्वारा निर्देशित हों।
- यह सेवा साक्ष्य, जोखिम मूल्यांकन और दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रदान करके मौजूदा प्रशासनिक प्रणालियों की पूरक होगी।
परीक्षा तथ्य
- Central Civil Services (Conduct) Rules, 1964 वर्तमान में कई वैज्ञानिक भूमिकाओं को नियंत्रित करते हैं।
- प्रस्तावित विशेष कैडर में Indian Environmental and Ecological Service और Indian Marine and Ocean Services शामिल हैं।
- Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) और Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के पास कुछ अलग नियम हैं लेकिन वे सीमित हैं।
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