भारत के युवाओं पर नए Labour Codes का प्रभाव और Gig Economy का औपचारिकीकरण

भारत के चार नए Labour Codes का उद्देश्य रोजगार के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देना और व्यापार करने में आसानी (ease of doing business) में सुधार करना है। हालांकि, Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2023-24 के आंकड़े युवाओं (15-29 वर्ष) के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों पर प्रकाश डालते हैं। युवा बेरोजगारी 10.2% है, और युवा श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा बिना लिखित अनुबंध या सामाजिक सुरक्षा के अनौपचारिक या स्व-रोजगार भूमिकाओं में है। नए कोड 'gig worker' श्रेणी पेश करते हैं और सामाजिक सुरक्षा को अनिवार्य बनाते हैं, लेकिन कवरेज में अंतराल और वैधानिक राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन की कमी श्रम अधिवक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

मुख्य बिंदु

  • चार Labour Codes अनुपालन को सरल बनाने और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने के लिए 29 केंद्रीय कानूनों को समेकित करते हैं।
  • युवा श्रम शक्ति भागीदारी 46.5% है, जो 30-59 वर्ष की आयु वालों के लिए 76.4% की तुलना में काफी कम है।
  • 90% से अधिक युवा श्रमिक अनौपचारिक रूप से नियोजित हैं, और नियमित वेतनभोगी युवाओं में से 66.1% के पास लिखित अनुबंध नहीं है।
  • ये कोड पहली बार gig और platform श्रमिकों को मान्यता देते हैं, जो पंजीकरण और सामाजिक सुरक्षा लाभों का प्रावधान करते हैं।

परीक्षा तथ्य

  • चार कोड हैं: Code on Wages (2019), Industrial Relations Code (2020), Social Security Code (2020), और OSHWC Code (2020)।
  • NITI Aayog का अनुमान है कि 2029-30 तक गिग वर्कफोर्स बढ़कर 2.35 करोड़ हो जाएगी।

पढ़ें। याद रखें। याद करें।

स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।

Google Play पर पाएं

के सभी करेंट अफेयर्स 28 जनवरी 2026