महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उत्पादकता बढ़ाने के लिए Budget 2026-27 में Gender Lens को एकीकृत करना
जैसे-जैसे भारत Budget 2026-27 की तैयारी कर रहा है, महिलाओं के समय और उत्पादकता पर बाधाओं को दूर करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। भारत के GDP में महिलाएं केवल 18% योगदान देती हैं, जिसका मुख्य कारण अवैतनिक घरेलू काम का बोझ है। लेख PMAY और Jal Jeevan Mission जैसी योजनाओं को 'gender-savings' फोकस के साथ फिर से तैयार करने का सुझाव देता है। प्रमुख सिफारिशों में 'Care Infrastructure Convenience Window' का विस्तार करना, महिला-नेतृत्व वाले MSMEs के लिए आवंटन बढ़ाना और AI-संचालित भविष्य के लिए महिलाओं को कौशल प्रदान करना शामिल है। लक्ष्य केवल महिलाओं पर खर्च करने से आगे बढ़कर लक्षित gender budgeting के माध्यम से आय, एजेंसी और अवसर में परिणाम सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु
- महिलाओं का अवैतनिक श्रम औपचारिक कार्यबल में उनकी भागीदारी के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है।
- Gender budgeting को पाइप से पानी और स्वच्छ खाना पकाने की ऊर्जा जैसे समय बचाने वाले बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- 'Care Infrastructure Convenience Window' का प्रस्ताव समय-उपयोग मेट्रिक्स पर रिपोर्टिंग को अनिवार्य करने के लिए किया गया है।
- वर्तमान में Mudra ऋण राशि का केवल 4% महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को वितरित किया जाता है, जो क्रेडिट अंतर को उजागर करता है।
परीक्षा तथ्य
- भारत के GDP में महिलाओं का योगदान 18% है
- Mudra ऋण राशि का 4% महिलाओं को जाता है
- VB-GRAM G (MGNREGA रीब्रांडिंग) का लक्ष्य 100-125 दिनों का रोजगार है
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