गाजा संघर्ष समाधान के लिए ट्रंप के प्रस्तावित "Board of Peace" में शामिल होने पर भारत की रणनीतिक दुविधा
भारत ने हाल ही में दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले "Board of Peace" (BoP) चार्टर की घोषणा में हिस्सा नहीं लिया। BoP गाजा शांति प्रस्ताव के चरण 2 का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य द्वि-राष्ट्र समाधान (two-state solution) है। हालांकि UN Security Council ने नवंबर 2025 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, लेकिन BoP की संरचना एकतरफा बदली हुई प्रतीत होती है, जो संभावित रूप से UN की जगह ले सकती है। भारत पर दबाव है क्योंकि UAE, सऊदी अरब और इजरायल जैसे क्षेत्रीय भागीदार इसमें शामिल हो गए हैं। हालांकि, फिलिस्तीनी नेतृत्व को बाहर रखने, पाकिस्तान को शामिल करने और BoP द्वारा कश्मीर विवाद में हस्तक्षेप की संभावना को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
मुख्य बिंदु
- BoP का लक्ष्य इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को हल करना है, लेकिन इसमें आधिकारिक फिलिस्तीनी नेतृत्व का प्रतिनिधित्व नहीं है।
- भारत फिलिस्तीनी मुद्दे का पारंपरिक समर्थक है और महत्वपूर्ण मानवीय सहायता प्रदान करता है।
- BoP में शामिल होने से इनकार करने पर अमेरिका की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है, लेकिन शामिल होने से भारत की स्वतंत्र विदेश नीति (independent foreign policy) प्रभावित हो सकती है।
- BoP की दो-स्तरीय सदस्यता के लिए 'स्थायी' दर्जे हेतु 1 बिलियन डॉलर के शुल्क की आवश्यकता है, जो इसकी वैधता पर सवाल उठाता है।
परीक्षा तथ्य
- BoP चार्टर की घोषणा जनवरी 2026 में दावोस में की गई थी।
- UN Security Council ने नवंबर 2025 में गाजा शांति प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
- BoP में 'स्थायी' दर्जे के लिए सदस्यता शुल्क 1 बिलियन डॉलर है।
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