CAPF कैडरों में IPS प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका
सेवानिवृत्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) अधिकारियों ने केंद्रीय गृह सचिव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिका में 2025 के अदालत के उस फैसले को लागू न करने का आरोप लगाया गया है जिसमें महानिरीक्षक (IG) के पद तक CAPFs में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति में प्रगतिशील कमी का निर्देश दिया गया था। अदालत ने पहले फैसला सुनाया था कि CAPFs के ग्रुप A कार्यकारी कैडर अधिकारी 'Organised Group A Services' (OGAS) हैं, जो उन्हें विशिष्ट पदोन्नति लाभों का हकदार बनाता है और IPS जैसी अन्य सेवाओं से पार्श्व प्रवेश (lateral entry) को सीमित करता है।
मुख्य बिंदु
- CAPF अधिकारी बेहतर करियर प्रगति और पदोन्नति समानता सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से 'Organised Group A Service' का दर्जा मांग रहे हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में IPS प्रतिनियुक्ति में दो साल की कटौती और कैडर और सेवा नियमों की व्यापक समीक्षा का आदेश दिया था।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इन परिवर्तनों को लागू करने में कथित विफलता के कारण वर्तमान अवमानना याचिका दायर की गई है।
- मानव संसाधन आवश्यकताओं का अनुमान लगाने और पदोन्नति बाधाओं से बचने के लिए हर पांच साल में कैडर समीक्षा की जानी चाहिए।
- विवाद आंतरिक कैडर पदोन्नति और IPS से पार्श्व प्रतिनियुक्ति के बीच संतुलन पर केंद्रित है।
परीक्षा तथ्य
- सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में फैसला सुनाया कि CAPF ग्रुप A अधिकारी Organised Group A Services (OGAS) से संबंधित हैं।
- CAPFs की आखिरी कैडर समीक्षा 2016 में की गई थी।
- याचिका केंद्रीय गृह सचिव Govind Mohan के खिलाफ दायर की गई थी।
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