सरकार ने 'Digital Arrest' घोटालों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अंतर-विभागीय पैनल का गठन किया
केंद्र सरकार ने Supreme Court को सूचित किया कि उसने 'digital arrest' घोटालों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) की स्थापना की है। इन घोटालों में जालसाज नागरिकों, विशेष रूप से बुजुर्गों से पैसे वसूलने के लिए कानून प्रवर्तन अधिकारियों का रूप धारण करते हैं। Special Secretary (Internal Security) की अध्यक्षता वाली IDC में गृह मंत्रालय (MHA), RBI, CBI और Google और WhatsApp जैसे प्रमुख तकनीकी प्लेटफार्मों के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति का उद्देश्य नियामक कमियों की पहचान करना, सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना और एक बड़ी आबादी को प्रभावित करने वाली इस समस्या को दूर करने के लिए वास्तविक समय में प्रवर्तन एजेंसियों का मार्गदर्शन करना है।
मुख्य बिंदु
- डिजिटल अरेस्ट ने परिष्कृत मनोवैज्ञानिक हेरफेर और प्रतिरूपण के माध्यम से नागरिकों को करोड़ों रुपये से वंचित कर दिया है।
- Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) IDC में केंद्रीय भूमिका निभाता है, जिसके CEO इसके सदस्य-सचिव हैं।
- समिति वर्तमान नियमों और परिपत्रों में 'वास्तविक समय के मुद्दों' और कार्यान्वयन अंतराल की जांच करेगी।
- Attorney-General R. Venkataramani कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए नियमित आधार पर IDC की बैठकों में भाग लेंगे।
परीक्षा तथ्य
- Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C)
- Ministry of Home Affairs (MHA)
- 26 दिसंबर को IDC का गठन
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