रिमोट सेंसिंग तकनीक ने अंतरिक्ष से प्राकृतिक संसाधनों, कृषि और भूजल के मानचित्रण में क्रांति ला दी है
रिमोट सेंसिंग पृथ्वी की सतह से विद्युत चुम्बकीय विकिरण का पता लगाने के लिए उपग्रहों और ड्रोन का उपयोग करता है, जिससे वैज्ञानिकों को भौतिक संपर्क के बिना संसाधनों का मानचित्रण करने की अनुमति मिलती है। 'स्पेक्ट्रल सिग्नेचर' (प्रकाश के अद्वितीय परावर्तन) का विश्लेषण करके, यह पौधों के स्वास्थ्य, खनिज भंडार और जल निकायों की पहचान कर सकता है। उदाहरण के लिए, स्वस्थ पौधे अधिक निकट-अवरक्त (near-infrared) प्रकाश को परावर्तित करते हैं। NASA के GRACE जैसे उपग्रह भूजल की कमी को ट्रैक करने के लिए गुरुत्वाकर्षण परिवर्तनों को मापते हैं। यह तकनीक सटीक कृषि, तेल और गैस ट्रैप की पहचान करने और रेगिस्तानों के विस्तार या जंगलों के स्वास्थ्य जैसे पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- रिमोट सेंसिंग दृश्य और अदृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम में वस्तुओं की उनके अद्वितीय स्पेक्ट्रल सिग्नेचर के आधार पर पहचान करता है।
- पौधों के स्वास्थ्य और वन घनत्व का आकलन करने के लिए Normalized Difference Vegetation Index (NDVI) का उपयोग किया जाता है।
- उपग्रहों द्वारा पता लगाई गई गुरुत्वाकर्षण विसंगतियां भूमिगत संरचनाओं के मानचित्रण और भूजल स्तर को ट्रैक करने में मदद करती हैं।
- Synthetic Aperture Radar (SAR) बादलों, धुएं और अंधेरे के माध्यम से इमेजिंग की अनुमति देता है।
परीक्षा तथ्य
- NDVI (Normalized Difference Vegetation Index) पौधों के स्वास्थ्य को मापता है।
- GRACE (Gravity Recovery and Climate Experiment) मिशन भूजल को ट्रैक करता है।
- SAR (Synthetic Aperture Radar) का उपयोग सभी मौसमों में इमेजिंग के लिए किया जाता है।
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