भारत में Vande Mataram और Jana Gana Mana का ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी स्थिति

'Vande Mataram' बनाम 'Jana Gana Mana' की स्थिति पर बहस फिर से शुरू हो गई है, जो संविधान सभा के निर्णयों तक जाती है। जबकि 'Jana Gana Mana' को 1950 में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था, स्वतंत्रता संग्राम में इसकी ऐतिहासिक भूमिका के कारण 'Vande Mataram' को राष्ट्रीय गीत के रूप में समान दर्जा दिया गया था। हाल की कानूनी याचिकाओं में दोनों को समान मानने की मांग की गई थी, लेकिन सरकार और अदालतों ने उनके अलग-अलग कानूनी ढांचे को बनाए रखा है। लेख इस बात पर प्रकाश डालता है कि जहां राष्ट्रगान Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 जैसे विशिष्ट कानूनों के तहत संरक्षित है, वहीं राष्ट्रीय गीत की स्थिति काफी हद तक औपचारिक है और इसमें समानांतर दंडात्मक प्रावधान का अभाव है।

मुख्य बिंदु

  • Vande Mataram पहली बार 1896 के कांग्रेस सत्र में Rabindranath Tagore द्वारा गाया गया था और यह राष्ट्रीय आंदोलन का केंद्र बिंदु बन गया था।
  • संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को Jana Gana Mana को राष्ट्रगान के रूप में अपनाया, जबकि Vande Mataram के समान दर्जे का सम्मान किया।
  • 42वें संशोधन (1976) ने Article 51A के तहत राष्ट्रगान और ध्वज का सम्मान करने के लिए एक मौलिक कर्तव्य पेश किया।
  • अदालतों ने फैसला सुनाया है कि हालांकि दोनों सम्मान के पात्र हैं, लेकिन वे अलग-अलग कानूनी प्रावधानों द्वारा शासित हैं, जिसमें राष्ट्रगान को विशिष्ट दंडात्मक सुरक्षा प्राप्त है।

परीक्षा तथ्य

  • Prevention of Insults to National Honour Act, 1971: राष्ट्रगान को अनादर से बचाता है।
  • Article 51A: मौलिक कर्तव्यों को सूचीबद्ध करता है, जिसमें राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान शामिल है।
  • राष्ट्रगान अपनाने की तिथि: 24 जनवरी, 1950, Dr. Rajendra Prasad के एक बयान द्वारा।

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