सैटेलाइट डेटा में विसंगतियां: Burnt-Area माप पराली जलाने में कमी के आधिकारिक दावों को चुनौती देते हैं
अनुसंधान संस्था iForest के एक अध्ययन से पता चलता है कि पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने (stubble burning) पर नज़र रखने के लिए उपयोग किए जाने वाले आधिकारिक 'fire counts' भ्रामक हो सकते हैं। जहाँ सरकारी डेटा 2021 से आग की घटनाओं में 90% की कमी का दावा करता है, वहीं 'burnt-area' माप केवल 30% की गिरावट दिखाते हैं। यह विसंगति इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि Suomi-NPP (VIIRS) और Aqua (MODIS) जैसे उपग्रह केवल विशिष्ट समय पर भारत के ऊपर से गुजरते हैं, जिससे शाम को लगने वाली आग छूट जाती है। Meteosat जैसे Geostationary उपग्रह, जो हर 15 मिनट में डेटा प्रदान करते हैं, संकेत देते हैं कि कई आग की घटनाएं ध्रुवीय-कक्षा (polar-orbiting) उपग्रहों के डिटेक्शन विंडो के बाहर होती हैं, जिससे उत्सर्जन की महत्वपूर्ण कम गिनती होती है।
मुख्य बिंदु
- Burnt-area माप पराली जलाने में 30% की गिरावट दिखाते हैं, जो fire counts के माध्यम से दावा की गई 90% की कमी के विपरीत है।
- VIIRS और MODIS जैसे वर्तमान सैटेलाइट सेंसर केवल विशिष्ट दिन के समय (सुबह 10:30 से दोपहर 1:30 बजे) सक्रिय आग को पकड़ते हैं।
- छोटी आग और शाम को लगने वाली आग अक्सर ध्रुवीय-कक्षा उपग्रहों द्वारा छूट जाती है।
- अध्ययन कृषि संबंधी आग के अधिक सटीक प्रॉक्सी के रूप में 100m x 100m के रिज़ॉल्यूशन पर 'burnt area' का उपयोग करने की सिफारिश करता है।
परीक्षा तथ्य
- iForest अनुसंधान संस्था।
- उपयोग किए गए उपग्रह: Suomi-NPP (VIIRS), Terra और Aqua (MODIS), Sentinel (Multi-Spectral Instrument)।
- 2022 में जला हुआ क्षेत्र 31,500 वर्ग किमी था जबकि 2025 में यह 19,700 वर्ग किमी था।
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