Census Act 1948 के तहत कानूनी बाध्यताएं और पहली डिजिटल जनगणना की योजनाएं

केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि Census Act, 1948 की Section 8(2) के तहत, उत्तरदाता अपनी सर्वोत्तम जानकारी के अनुसार प्रश्नों का उत्तर देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। इसमें जाति से संबंधित प्रश्न शामिल हैं, क्योंकि आगामी Census 2027 स्वतंत्र भारत में जाति की गणना करने वाली पहली जनगणना होगी। अगली जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना भी होगी। सरकार वर्तमान में प्रश्नावली को अंतिम रूप दे रही है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने स्कूल बोर्ड परीक्षाओं के साथ जनगणना की समय-सीमा के टकराव के संबंध में चिंताओं को संबोधित किया, यह देखते हुए कि प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों को पारंपरिक रूप से प्रगणक (enumerators) के रूप में नियुक्त किया जाता है।

मुख्य बिंदु

  • Census Act, 1948 की Section 8(2) नागरिकों के लिए जनगणना अधिकारियों को जानकारी प्रदान करना अनिवार्य बनाती है।
  • Census 2027 पहली डिजिटल जनगणना होगी और स्वतंत्रता के बाद जाति गणना को शामिल करने वाली पहली जनगणना होगी।
  • Office of the Registrar General and Census Commissioner जनगणना प्रक्रिया और प्रश्नावली को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार है।
  • प्रगणकों के रूप में शिक्षकों का उपयोग एक मानक अभ्यास है जो परीक्षा कार्यक्रम की चिंताओं के बावजूद 2027 के अभ्यास के लिए जारी रहेगा।

परीक्षा तथ्य

  • Census Act, 1948 (विशेष रूप से Section 8(2)) उत्तरदाताओं की कानूनी बाध्यता को नियंत्रित करता है।
  • अगली जनगणना 2027 के लिए निर्धारित है।
  • यह स्वतंत्र भारत में पहली जाति गणना होगी।

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