भारत के Decarbonization और Net-Zero लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए Energy Efficiency को प्राथमिकता देना
तेजी से Renewable विकास के बावजूद, भारत का Grid Emission Factor (GEF) बढ़ गया है, जो Renewables की क्षमता-उत्पादन बेमेल के कारण एक गंदे ग्रिड का संकेत देता है। कोयले की तुलना में Solar और Wind का क्षमता उपयोग (15-25%) कम है। लेख का तर्क है कि Energy Efficiency 'पहला ईंधन' है और ग्रिड को वास्तव में Decarbonize करने के लिए इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भारत ने दक्षता उपायों के माध्यम से FY2017-18 और FY2022-23 के बीच लगभग 200 million tonnes of oil equivalent की बचत की, जिससे ₹7,60,000 करोड़ की बचत हुई। सिफारिशों में Virtual power plants को सक्षम करना, Appliance standards में तेजी लाना और पीक डिमांड को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए पुराने, अक्षम उपकरणों के लिए Scrapage incentives पेश करना शामिल है।
मुख्य बिंदु
- भारत का Grid Emission Factor (GEF) 0.703 से बढ़कर 0.727 tCO2/MWh हो गया है, जो दर्शाता है कि Renewable विकास के बावजूद ग्रिड अधिक कार्बन-गहन हो रहा है।
- Solar और Wind जैसे Renewables का क्षमता उपयोग कम (15-25%) है, जिसके कारण पीक डिमांड के दौरान जीवाश्म ईंधन संयंत्रों को 'शॉक एब्जॉर्बर' के रूप में कार्य करने की आवश्यकता होती है।
- Energy Efficiency उपायों ने पांच साल की अवधि में भारत को लगभग 200 million tonnes of oil equivalent और ₹7.6 लाख करोड़ की बचत कराई।
- Central Electricity Authority ने बेहतर दक्षता और सिस्टम लचीलेपन के माध्यम से 2026-27 तक GEF के गिरकर 0.548 होने का अनुमान लगाया है।
परीक्षा तथ्य
- 2023-24 में भारत का Grid Emission Factor (GEF) बढ़कर 0.727 tCO2/MWh हो गया।
- Energy Efficiency ने भारत में FY2017-18 से FY2022-23 तक ₹7,60,000 करोड़ की बचत की।
- जून 2025 तक भारत की कुल स्थापित क्षमता में Non-fossil fuel स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 50% है।
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