केरल 1 नवंबर को अत्यधिक गरीबी से मुक्त होने वाला भारत का पहला राज्य बनने के लिए तैयार
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 1 नवंबर को आधिकारिक तौर पर राज्य को अत्यधिक गरीबी से मुक्त घोषित करने वाले हैं। यह उपलब्धि 2021 में शुरू किए गए 'अत्यधिक गरीबी उन्मूलन परियोजना' (Extreme Poverty Eradication Project) के बाद मिली है, जिसने जमीनी स्तर के सर्वेक्षणों के माध्यम से 64,006 अत्यधिक गरीब परिवारों की पहचान की थी। सरकार ने प्रत्येक परिवार के लिए सूक्ष्म-योजनाएं (micro-plans) लागू कीं, जिसमें आधार और राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज, आवास, भूमि और आजीविका सहायता प्रदान की गई। 2021 के नीति आयोग (NITI Aayog) के अध्ययन के अनुसार, केरल में पहले से ही भारत में सबसे कम गरीबी दर 0.7% थी।
मुख्य बिंदु
- परियोजना ने पहचान के लिए चार प्रमुख कारकों पर ध्यान केंद्रित किया: भोजन, स्वास्थ्य, आजीविका और आश्रय।
- योजना के तहत 21,000 से अधिक व्यक्तियों को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हुए, और लगभग 4,000 परिवारों को नए घर प्रदान किए गए।
- राज्य ने 59,277 परिवारों को अत्यधिक गरीबी से सफलतापूर्वक बाहर निकाला, जबकि उन लोगों के लिए व्यवस्था बनी हुई है जो पलायन कर गए हैं या मृत हैं।
परीक्षा तथ्य
- नीति आयोग (NITI Aayog) के 2021 के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) अध्ययन के अनुसार केरल की गरीबी दर 0.7% थी।
- अत्यधिक गरीबी उन्मूलन परियोजना (Extreme Poverty Eradication Project) 2021 में शुरू की गई थी।
- जमीनी स्तर के सर्वेक्षण के दौरान शुरू में 64,006 परिवारों की पहचान अत्यधिक गरीब के रूप में की गई थी।
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