अध्ययन ने मिट्टी के आर्सेनिक स्तर और चावल की उपज के बीच माइक्रोबियल लिंक का खुलासा किया

Proceedings of the National Academy of Sciences में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि केवल मिट्टी के आर्सेनिक स्तर के बजाय चावल के धान के सूक्ष्मजीव (microbes), आर्सेनिक विषाक्तता और फसल के नुकसान को निर्धारित करते हैं। अध्ययन ने 17 प्रमुख सूक्ष्मजीवों की पहचान की जो आर्सेनिक जोखिम की भविष्यवाणी करते हैं। विशेष रूप से, आर्सेनिक-मिथाइलेटिंग बैक्टीरिया डाइमिथाइलार्सिनिक एसिड (DMA) का उत्पादन करते हैं, जिससे 'straighthead disease' होती है, जिससे उपज में 70% तक की हानि हो सकती है। इसके विपरीत, पुरानी मिट्टी (700 वर्ष से अधिक) में पाए जाने वाले डीमिथाइलेटिंग आर्किया (archaea) विषाक्तता को कम करने में मदद करते हैं। यह खोज बताती है कि कृषि संबंधी प्रथाओं, जैसे कि ऑक्सीजन को फिर से पेश करने के लिए मध्य-सीजन जल निकासी (midseason drainage) के माध्यम से माइक्रोबियल संतुलन का प्रबंधन करना, चावल की उपज की रक्षा कर सकता है और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।

मुख्य बिंदु

  • धान की मिट्टी में माइक्रोबियल संरचना कुल आर्सेनिक सांद्रता की तुलना में आर्सेनिक जोखिम का अधिक सटीक भविष्यवक्ता है।
  • आर्सेनिक-मिथाइलेटिंग बैक्टीरिया जहरीले कार्बनिक आर्सेनिक को बढ़ाते हैं, जिससे चावल में straighthead disease होती है।
  • लंबे समय से खेती की जाने वाली मिट्टी में प्रचलित डीमिथाइलेटिंग आर्किया, आर्सेनिक विषाक्तता के खिलाफ एक सुरक्षात्मक बाधा के रूप में कार्य करते हैं।
  • मध्य-सीजन जल निकासी जैसे कृषि हस्तक्षेप हानिकारक सूक्ष्मजीवों को दबा सकते हैं और फसल सुरक्षा में सुधार कर सकते हैं।

परीक्षा तथ्य

  • रोग का नाम: Straighthead disease।
  • विषाक्त यौगिक: Dimethylarsinic acid (DMA)।
  • उपज हानि की संभावना: गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में 70% तक।

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