सितंबर 2025 में रिटेल इन्फ्लेशन के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से RBI के सामने नीतिगत चुनौतियां
सितंबर 2025 में भारत की रिटेल इन्फ्लेशन (खुदरा मुद्रास्फीति) 99 महीने के निचले स्तर 1.54% पर आ गई, जो RBI के 2%-6% के कंफर्ट बैंड से नीचे है। यह प्रवृत्ति बताती है कि आपूर्ति मांग से अधिक हो रही है, जो चीन की ओवरसप्लाई समस्या के समान स्थिति है। लेख का तर्क है कि RBI को अपने पूर्वानुमान की सटीकता में सुधार करने की आवश्यकता है, क्योंकि इसकी भविष्यवाणियों में कम अवधि के भीतर भारी संशोधन देखे गए हैं। अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए, Monetary Policy Committee (MPC) से दिसंबर में ब्याज दरों में महत्वपूर्ण कटौती पर विचार करने का आह्वान किया गया है ताकि निजी निवेश और खपत को बढ़ावा मिल सके, क्योंकि वर्तमान में घरेलू बचत का उपयोग खर्च बढ़ाने के बजाय कर्ज कम करने के लिए किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- सितंबर 2025 में रिटेल इन्फ्लेशन 99 महीने के निचले स्तर 1.54% पर पहुंच गई।
- RBI का लक्ष्य मुद्रास्फीति दर 4% है, जिसमें 2%-6% का टॉलरेंस बैंड है।
- कम मुद्रास्फीति कमजोर घरेलू मांग का संकेत देती है, जिससे MPC द्वारा ब्याज दरों में कटौती की मांग बढ़ रही है।
- मुद्रास्फीति लक्ष्यों के बार-बार और भारी संशोधनों के कारण RBI की पूर्वानुमान प्रक्रिया जांच के दायरे में है।
परीक्षा तथ्य
- रिटेल इन्फ्लेशन दर: 1.54% (सितंबर 2025)
- RBI इन्फ्लेशन लक्ष्य: 4% (+/- 2%)
- दिसंबर के लिए निर्धारित Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक
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