हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (PK3Y) और MSP समर्थन के माध्यम से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दे रहा है
हिमाचल प्रदेश में किसान राज्य की प्रमुख 'प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना' (PK3Y) द्वारा समर्थित रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती के तरीकों को तेजी से अपना रहे हैं। राज्य सरकार ने मक्का, गेहूं और कच्ची हल्दी जैसी प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए विशेष रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) शुरू करके इस बदलाव को प्रोत्साहित किया है। 3.06 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया गया है, और 2.22 लाख किसान 38,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर इसका अभ्यास कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती ने मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार किया है, इनपुट लागत कम की है और रसायन आधारित तरीकों की तुलना में बेहतर उपज प्रदान की है, जिससे पहाड़ी राज्य में किसान कल्याण और पर्यावरण संरक्षण दोनों में योगदान मिला है।
मुख्य बिंदु
- PK3Y गैर-रासायनिक, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल प्रदेश की प्रमुख योजना है।
- राज्य प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए विशिष्ट MSP प्रदान करता है: मक्का (₹40/किग्रा), गेहूं (₹60/किग्रा), और कच्ची हल्दी (₹90/किग्रा)।
- प्राकृतिक खेती किसानों को साइट पर सभी आवश्यक इनपुट तैयार करने की अनुमति देकर बाजार पर निर्भरता कम करती है।
- मानकों को सुनिश्चित करने के लिए प्राकृतिक खेती करने वालों को प्रमाणित करने और उनका आकलन करने के लिए CETARA-NF टूल का उपयोग किया जाता है।
परीक्षा तथ्य
- PK3Y: प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना (Prakritik Kheti Khushhal Kisan Yojana)।
- प्राकृतिक गेहूं के लिए MSP: ₹60/किग्रा; मक्का: ₹40/किग्रा।
- PK3Y योजना के तहत 3.06 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया है।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।