भारत-पाकिस्तान सुरक्षा चिंताएं और Sir Creek दलदली भूमि विवाद का रणनीतिक महत्व
यह लेख Sir Creek के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करता है, जो गुजरात (भारत) और सिंध (पाकिस्तान) के बीच एक निर्जन दलदली भूमि है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने हाल ही में 1965 के युद्ध के साथ समानताएं बताते हुए इस क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य गतिविधि के खिलाफ चेतावनी दी। Sir Creek एक विवादित समुद्री सीमा है जो तेल, गैस और मछली पकड़ने के अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र अत्यंत चुनौतीपूर्ण है, जिसकी विशेषता बदलती ज्वार-भाटा प्रणाली और बुनियादी ढांचे की कमी है। भारत BSF, Army, Coast Guard और Air Force को शामिल करते हुए एक बहु-स्तरीय सुरक्षा उपस्थिति बनाए रखता है। हालिया चिंताओं में पाकिस्तानी Rann of Kutch में चीनी समर्थित परियोजनाएं और ड्रोन खतरे शामिल हैं, जिसके लिए एक राजनयिक लेकिन दृढ़ सुरक्षा दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- Sir Creek Rann of Kutch दलदली भूमि में भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित 96-km लंबी पानी की पट्टी है।
- यह क्षेत्र अपने संभावित तेल और गैस भंडार और समृद्ध मछली पकड़ने के क्षेत्रों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
- इस क्षेत्र में भारत के सुरक्षा ढांचे में सशस्त्र बलों के कई अंगों के साथ 'layered security' दृष्टिकोण शामिल है।
- क्षेत्र का भूगोल बड़े पैमाने पर जमीनी अभियानों को लगभग असंभव बना देता है, जिससे ध्यान समुद्री और हवाई निगरानी पर केंद्रित हो जाता है।
- Rann of Kutch के पाकिस्तानी हिस्से में चीनी समर्थित खनन और बिजली परियोजनाएं एक नई रणनीतिक-सैन्य चुनौती पेश करती हैं।
परीक्षा तथ्य
- Sir Creek गुजरात (भारत) और सिंध (पाकिस्तान) के बीच स्थित है।
- Operation Sindoor में लगभग 400 ड्रोनों के साथ सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला करने का पाकिस्तानी प्रयास शामिल था।
- आसपास के प्रमुख भारतीय बंदरगाहों में Gulf of Kutch में Mundra और Kandla शामिल हैं।
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