उच्च मूल्यांकन के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से हाथ खींचे
Foreign Portfolio Investors (FPIs) 2024 के अंत तक लगातार तीन महीनों से भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे हैं। अकेले सितंबर 2024 में, FPIs ने ₹23,885 करोड़ निकाले। विश्लेषक इस प्रवृत्ति का कारण भारतीय शेयरों के अत्यधिक उच्च मूल्यांकन, सुस्त कॉर्पोरेट आय और अमेरिकी टैरिफ नीतियों जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं को मानते हैं। इसके अलावा, चीनी बाजार की ओर धन का एक उल्लेखनीय बदलाव हुआ है, जिसे अधिक आकर्षक मूल्यांकन वाला माना जाता है। डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने भी भारतीय इक्विटी से डॉलर रिटर्न के आकर्षण को कम कर दिया है, जिससे वैश्विक फंड प्रबंधकों के बीच सतर्कता का माहौल है।
मुख्य बिंदु
- FPIs ने जनवरी और सितंबर 2025 के बीच भारतीय इक्विटी से लगभग ₹1.54 lakh crore निकाले हैं।
- उच्च मूल्यांकन और स्थिर कॉर्पोरेट आय ने चीन जैसे उभरते समकक्षों की तुलना में भारतीय शेयरों को कम आकर्षक बना दिया है।
- वैश्विक उभरते बाजार (GEM) प्रबंधकों ने भारत के आवंटन को घटाकर 16.7% कर दिया है, जो 2023 के अंत के बाद सबसे कम है।
- कमजोर होता रुपया और संभावित अमेरिकी टैरिफ परिवर्तन FPI प्रवाह में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं।
परीक्षा तथ्य
- FPIs ने सितंबर 2024 में ₹23,885 crore निकाले।
- GEM (Global Emerging Market) फंडों में भारत का आवंटन 21% के शिखर से गिरकर 16.7% हो गया।
- अगस्त 2025 तक, वैश्विक फंडों के पास भारतीय संपत्तियों में $390 billion थे।
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