UN आतंकवाद विरोधी और प्रतिबंध समितियों में पाकिस्तान की नेतृत्वकारी भूमिकाओं पर चिंताएं जताई गईं
UN के प्रमुख निकायों में पाकिस्तान की हालिया नियुक्तियों, जिसमें Counter-Terrorism Committee के उपाध्यक्ष और Taliban Sanctions Committee शामिल हैं, ने अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। आलोचकों का तर्क है कि LeT और JeM जैसे आतंकवादी समूहों को पनाह देने के इतिहास वाले देश को नेतृत्व की भूमिका देना UN की विश्वसनीयता को कम करता है। भारत ने चिंता व्यक्त की है, क्योंकि ये पद पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद विरोधी नीतियों को प्रभावित करने और संभावित रूप से अपने स्वयं के आतंकी संबंधों को ढाल देने की अनुमति देते हैं। यह स्थिति UN के भीतर भू-राजनीतिक पैंतरेबाज़ी के रुझान को उजागर करती है, जहाँ शक्तिशाली राष्ट्र रणनीतिक हितों के लिए ऐसी नियुक्तियों का समर्थन करते हैं, और संभावित रूप से राज्य प्रायोजित आतंकवाद की अनदेखी करते हैं।
मुख्य बिंदु
- पाकिस्तान को UN Counter-Terrorism Committee और Taliban Sanctions Committee का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
- लश्कर-ए-तैयबा जैसे समूहों के साथ पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए इन नियुक्तियों को UN के मिशन के विपरीत देखा जा रहा है।
- UN सुरक्षा परिषद के सदस्यों तक अपनी राजनयिक पहुंच के बावजूद भारत को ऐसी नियुक्तियों को रोकने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- यह भूमिका पाकिस्तान को UN प्रतिबंधों के तहत आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने और हटाने को प्रभावित करने की अनुमति देती है।
परीक्षा तथ्य
- पाकिस्तान ने जुलाई महीने के लिए UN सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाली।
- IMF ने हाल ही में पाकिस्तान के लिए 7 बिलियन डॉलर की Extended Fund Facility को मंजूरी दी है।
- Taliban Sanctions Committee एक 15-देशीय UN निकाय है।
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