मेघालय में यूरेनियम खनन से जनजातीय अधिकारों और पर्यावरणीय प्रभाव पर अशांति

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा मेघालय में यूरेनियम खनन को सार्वजनिक परामर्श (public consultation) से छूट देने के निर्णय ने स्थानीय खासी समूहों के विरोध को जन्म दिया है। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों को दरकिनार करने के लिए एक Office Memorandum (OM) जारी किया। हालांकि, स्थानीय समुदायों और Khasi Hills Autonomous District Council (KHADC) का तर्क है कि यह Sixth Schedule के तहत जनजातीय अधिकारों का उल्लंघन है। आलोचकों का कहना है कि यूरेनियम खनन अत्यधिक प्रदूषणकारी है और परिदृश्य को अपरिवर्तनीय रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। वे वैश्विक मानदंडों के अनुसार 'स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति' की वकालत करते हैं और जबरन निष्कर्षण के बजाय वैकल्पिक बिजली उत्पादन रणनीतियों की खोज करने का सुझाव देते हैं।

मुख्य बिंदु

  • केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक Office Memorandum के माध्यम से परमाणु और रणनीतिक खनिजों को सार्वजनिक परामर्श से छूट दी है।
  • डॉमियासिएट और वाहकाजी में स्थानीय खासी समूहों ने विकिरण के डर से 1980 के दशक से यूरेनियम निष्कर्षण का विरोध किया है।
  • संविधान की Sixth Schedule जनजातीय जिला परिषदों को उनके अधिकारों की रक्षा के लिए स्वायत्त शक्तियां प्रदान करती है।
  • खनन परियोजनाओं के लिए सामुदायिक सहमति की आवश्यकता के लिए Niyamgiri (2013) के फैसले को एक मिसाल के रूप में उद्धृत किया गया है।

परीक्षा तथ्य

  • प्रासंगिक संवैधानिक अनुसूची: Sixth Schedule (जनजातीय क्षेत्र)।
  • प्रमुख कानूनी मिसाल: Niyamgiri (2013) मामला।
  • खनन स्थल: मेघालय में डॉमियासिएट (Domiasiat) और वाहकाजी (Wahkaji)।

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