उपभोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए GST सुधार और टू-टियर स्ट्रक्चर
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने विश्वास व्यक्त किया कि हालिया GST युक्तिकरण (rationalization), जिसमें टू-टियर टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) और 40% स्लैब की ओर कदम शामिल है, उपभोग को प्रोत्साहित करके GDP विकास को मजबूत करेगा। ₹48,000 करोड़ की अनुमानित राजस्व कमी के बावजूद, सरकार को उम्मीद है कि राजस्व उछाल (revenue buoyancy) चालू वित्त वर्ष के भीतर इस अंतर को पाट देगा। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स व्यवस्था को सरल बनाना है, जिससे यह एक 'जन सुधार' बन सके जो सभी नागरिकों को प्रभावित करता है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर GST की छूट को भारत की युवा आबादी की वित्तीय सुरक्षा का समर्थन करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रेखांकित किया गया है।
मुख्य बिंदु
- GST Council ने 5% और 18% के टू-टियर स्ट्रक्चर के साथ-साथ विशिष्ट वस्तुओं के लिए 40% के पीक स्लैब को मंजूरी दी।
- सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) का अनुमान GDP का 4.4% या लगभग ₹15.69 लाख करोड़ लगाया है।
- GST 2.0 का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स के बोझ को कम करना और घरेलू क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए बीमा जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को छूट देना है।
- इन सुधारों से भारतीय अर्थव्यवस्था को 6.3-6.8% की अनुमानित वास्तविक आर्थिक विकास दर (real economic growth rate) से आगे निकलने में मदद मिलने की उम्मीद है।
परीक्षा तथ्य
- 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य: GDP का 4.4% (₹15.69 लाख करोड़)।
- Economic Survey द्वारा अनुमानित वास्तविक आर्थिक विकास दर: 6.3-6.8%।
- प्रस्तावित GST युक्तिकरण स्लैब: 5%, 18%, और 40% की पीक दर।
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