भारत में स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के उदय और जोखिमों का विश्लेषण
Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY) और State Health Insurance Programmes (SHIPs) जैसी राज्य-प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है, फिर भी Universal Health Care (UHC) के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं। ये योजनाएं अक्सर केवल इन-पेशेंट (in-patient) देखभाल तक सीमित होती हैं और निजी प्रदाताओं पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, जिससे लाभ-संचालित उद्देश्य और गरीबों का बहिष्कार हो सकता है। मुद्दों में जागरूकता की कमी के कारण कम उपयोग दर, निजी अस्पतालों द्वारा बीमाकृत रोगियों के साथ भेदभाव और प्रतिपूर्ति में देरी शामिल है। विशेषज्ञों का तर्क है कि बीमा प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे में प्रत्यक्ष सार्वजनिक निवेश का विकल्प नहीं है।
मुख्य बिंदु
- PMJAY और SHIPs प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये के अधिकतम कवर के साथ तैयार किए गए हैं, लेकिन ये ज्यादातर इन-पेशेंट देखभाल तक सीमित हैं।
- भारत में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय GDP का 1.3% कम बना हुआ है, जबकि विश्व औसत 6.1% है।
- निजी अस्पताल अक्सर बीमा प्रतिपूर्ति दरों की तुलना में उच्च वाणिज्यिक शुल्क के कारण गैर-बीमाकृत रोगियों को प्राथमिकता देते हैं।
- National Health Authority (NHA) ने हाल ही में PMJAY के तहत 12,161 करोड़ रुपये से अधिक के लंबित बकाया का खुलासा किया है।
परीक्षा तथ्य
- Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY) 2018 में लॉन्च हुई
- भारत का सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय: GDP का 1.3%
- विश्व औसत स्वास्थ्य व्यय: GDP का 6.1%
- 1946 की Bhore Committee रिपोर्ट
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