ऊर्जा संप्रभुता: लचीले और स्वदेशी ऊर्जा भविष्य के लिए भारत की रणनीति
भारत, जो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर अत्यधिक निर्भर है, वैश्विक अस्थिरता के बीच महत्वपूर्ण ऊर्जा सुरक्षा जोखिमों का सामना करता है। यह लेख ऐतिहासिक ऊर्जा झटकों पर प्रकाश डालता है और घरेलू क्षमता, विविध प्रौद्योगिकी और लचीली प्रणालियों पर आधारित ऊर्जा संप्रभुता के सिद्धांत का प्रस्ताव करता है। पांच मूलभूत स्तंभों को रेखांकित किया गया है: स्वदेशी ऊर्जा के लिए Coal Gasification, ग्रामीण सशक्तिकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए Biofuels, शून्य-कार्बन बेसलोड के रूप में Nuclear Power, आत्मनिर्भरता के लिए Green Hydrogen, और ग्रिड संतुलन के लिए Pumped Hydro Storage। इस रणनीति का उद्देश्य एक निर्बाध, किफायती और स्वदेशी ऊर्जा भविष्य का निर्माण करना है, जिससे भू-राजनीतिक बदलावों और बाहरी निर्भरताओं के प्रति भेद्यता कम हो सके।
मुख्य बिंदु
- आयातित कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर भारत की अत्यधिक निर्भरता एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जोखिम पैदा करती है।
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को पांच प्रमुख ऐतिहासिक झटकों ने नया रूप दिया है, जो लचीलेपन की आवश्यकता पर जोर देता है।
- भारत को घरेलू क्षमता, विविध प्रौद्योगिकी और लचीली प्रणालियों पर आधारित ऊर्जा संप्रभुता के सिद्धांत को अपनाना चाहिए।
- ऊर्जा संप्रभुता के लिए पांच मूलभूत स्तंभों में Coal Gasification, Biofuels, Nuclear Energy, Green Hydrogen और Pumped Hydro Storage शामिल हैं।
- इस रणनीति का उद्देश्य निर्बाध, किफायती और स्वदेशी ऊर्जा सुनिश्चित करना है, जिससे बाहरी भू-राजनीतिक कारकों के प्रति भेद्यता कम हो सके।
परीक्षा तथ्य
- भारत अपने कच्चे तेल का 85% से अधिक और अपनी प्राकृतिक गैस का 50% से अधिक आयात करता है।
- 2024-25 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 35%-40% हिस्सा है।
- भारत के पास 150 बिलियन टन से अधिक कोयले का भंडार है।
- 2030 तक Green Hydrogen के लिए भारत का लक्ष्य प्रति वर्ष पांच मिलियन मीट्रिक टन है।
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