उत्तरकाशी में अचानक आई बाढ़ के कारण पर अनिश्चितता; ISRO ने नुकसान का आकलन किया

उत्तरकाशी, उत्तराखंड के धारली में अचानक आई बाढ़ और मलबे के हिमस्खलन के कई दिनों बाद भी आपदा का सटीक कारण अनिश्चित बना हुआ है। बचाव और राहत कार्यों ने वैज्ञानिक जांच में देरी की है। जबकि IMD उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इसे बादल फटना नहीं बताता है, विशेषज्ञ ग्लेशियर झील के अतिप्रवाह या भारी बारिश से भूस्खलन की अटकलें लगाते हैं। ऊपरी हिमालय के अनमैप्ड हिस्सों और AWS डेटा तक सीमित सार्वजनिक पहुंच के कारण ऐसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है। ISRO के National Remote Sensing Centre ने विनाश की सीमा निर्धारित करने के लिए उपग्रह छवियों का उपयोग करके एक "rapid assessment" किया है और ट्रिगरिंग घटना का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण कर रहा है।

मुख्य बिंदु

  • धारली, उत्तरकाशी में हाल ही में आई अचानक बाढ़ और मलबे के हिमस्खलन का कारण अनिश्चित बना हुआ है, जिससे वैज्ञानिक जांच में बाधा आ रही है।
  • IMD के प्रारंभिक आंकड़ों से बादल फटने का संकेत नहीं मिलता है, लेकिन विशेषज्ञ ग्लेशियर झील के अतिप्रवाह या भारी बारिश से प्रेरित भूस्खलन जैसी संभावनाओं का सुझाव देते हैं।
  • ऊपरी हिमालय में अनमैप्ड क्षेत्रों और स्वचालित मौसम स्टेशनों से सीमित सार्वजनिक डेटा के कारण ऐसी घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है।
  • ISRO का National Remote Sensing Centre तीव्र क्षति आकलन और ट्रिगरिंग घटना का निर्धारण करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह छवियों का उपयोग कर रहा है।
  • National Disaster Management Agency आपदा की जांच का समन्वय कर रही है।

परीक्षा तथ्य

  • अचानक बाढ़ धारली, उत्तरकाशी, उत्तराखंड में आई थी।
  • India Meteorological Department (IMD) ने बादल फटने की पुष्टि नहीं की।
  • ISRO के National Remote Sensing Centre ने आकलन के लिए Cartosat-2S उपग्रह छवियों का उपयोग किया।
  • Vineet Kumar Gahalaut Wadia Institute of Himalayan Geology, देहरादून के निदेशक हैं।

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