भूजल प्रदूषण से पुरानी बीमारियाँ बढ़ रही हैं, जिससे राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो रहा है
भारत में भूजल प्रदूषण एक राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल गया है, जिससे लाखों लोग खतरे में हैं। 2024 की CGWB रिपोर्ट नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और भारी धातुओं द्वारा व्यापक संदूषण का खुलासा करती है, जिससे कंकाल फ्लोरोसिस, कैंसर और न्यूरोलॉजिकल विकार जैसी पुरानी बीमारियाँ होती हैं। इस संकट का श्रेय प्रणालीगत उपेक्षा, कमजोर प्रवर्तन, खंडित नियामक प्रणालियों और अत्यधिक निष्कर्षण को दिया जाता है। Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974, भूजल के लिए अपर्याप्त है, और CGWB और SPCBs जैसे नियामक निकायों में अधिकार और संसाधनों की कमी है। सुरक्षित और टिकाऊ भूजल सुनिश्चित करने के लिए एक साहसी, बहु-आयामी रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें एक राष्ट्रीय ढाँचा, आधुनिक निगरानी, लक्षित उपचार और नागरिक-केंद्रित शासन शामिल है।
मुख्य बिंदु
- भारत में भूजल प्रदूषण एक राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है, जिससे लाखों लोग पुरानी बीमारियों से प्रभावित हैं।
- 2024 की CGWB रिपोर्ट नाइट्रेट, फ्लोराइड, आर्सेनिक, यूरेनियम और भारी धातुओं द्वारा व्यापक संदूषण पर प्रकाश डालती है।
- संदूषण से कंकाल फ्लोरोसिस, विभिन्न कैंसर और न्यूरोलॉजिकल विकार जैसे गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे होते हैं।
- कमजोर नियामक ढाँचे, खंडित संस्थागत निरीक्षण और अत्यधिक भूजल निष्कर्षण से संकट बढ़ गया है।
- टिकाऊ भूजल प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा, उन्नत निगरानी और नागरिक भागीदारी सहित एक व्यापक रणनीति महत्वपूर्ण है।
परीक्षा तथ्य
- 2024 की Annual Groundwater Quality Report Central Ground Water Board (CGWB) द्वारा जारी की गई है।
- 440 जिलों के 20% से अधिक नमूनों में नाइट्रेट्स से संदूषण पाया गया।
- फ्लोराइड संदूषण 20 राज्यों के 230 जिलों को प्रभावित करता है, जिससे 66 मिलियन लोगों में कंकाल फ्लोरोसिस होता है।
- Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974, भूजल को शायद ही संबोधित करता है।
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