MiG-21 के चरणबद्ध तरीके से बाहर करने में देरी, IAF के भविष्य के लड़ाकू जेट प्रेरण और स्वदेशी इंजन विकास का विश्लेषण

यह लेख Indian Air Force (IAF) के अपने लड़ाकू बेड़े के साथ चुनौतियों पर चर्चा करता है, विशेष रूप से MiG-21 के चरणबद्ध तरीके से बाहर करने में देरी, जो दुर्घटनाओं के लिए प्रवण हैं। यह LCA Tejas Mk1A, MMRCA 2.0 और AMCA जैसे नए विमानों की खरीद स्थिति पर प्रकाश डालता है। HAL द्वारा Tejas Mk1A के उत्पादन में देरी और MMRCA 2.0 टेंडर की धीमी प्रगति पर जोर दिया गया है। लेख पांचवीं पीढ़ी के AMCA के लिए इंजनों के स्वदेशी विकास पर भी प्रकाश डालता है, जिसमें एक विदेशी भागीदार के साथ संयुक्त उद्यम के लिए चल रही बातचीत का उल्लेख है। IAF का लक्ष्य अगले दो दशकों में 800 से अधिक लड़ाकू जेट विमानों को शामिल करना है ताकि 42 स्क्वाड्रनों की अपनी स्वीकृत शक्ति को प्राप्त किया जा सके।

मुख्य बिंदु

  • Indian Air Force को अपने पुराने MiG-21 लड़ाकू जेट विमानों को चरणबद्ध तरीके से बाहर करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिनका सुरक्षा रिकॉर्ड खराब है।
  • LCA Tejas Mk1A और MMRCA 2.0 जैसे नए लड़ाकू विमानों की खरीद में महत्वपूर्ण देरी हो रही है।
  • IAF का लक्ष्य अगले दो दशकों में 800 से अधिक लड़ाकू जेट विमानों को शामिल करना है ताकि 42 स्क्वाड्रनों की अपनी स्वीकृत शक्ति तक पहुंचा जा सके।
  • पांचवीं पीढ़ी के AMCA के लिए इंजनों का स्वदेशी विकास एक प्राथमिकता है, जिसके लिए संयुक्त उद्यम के लिए बातचीत चल रही है।

परीक्षा तथ्य

  • IAF की स्वीकृत शक्ति: 42 लड़ाकू स्क्वाड्रन।
  • MiG-21 को 2025 तक चरणबद्ध तरीके से बाहर किया जाना है।
  • HAL को 2029 तक 83 LCA-Mk1A जेट वितरित करने हैं।
  • AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) भारत की पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू परियोजना है।
  • LCA-Mk2 के लिए GE-414 इंजन पर विचार किया जा रहा है।

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