कारगिल, पहलगाम और भारत की विकसित होती सुरक्षा रणनीति

यह लेख बताता है कि कारगिल युद्ध (1999) और हालिया पहलगाम आतंकी हमला (2025) ने भारत की सुरक्षा रणनीति को कैसे आकार दिया है। कारगिल, एक "लाइव टेलीविज़न" संघर्ष, ने खुफिया, उपकरण और समन्वय में कमजोरियों को उजागर किया, जिससे DIA, NTRO और CDS पद के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन हुए। इसने सैन्य आधुनिकीकरण और "Cold Start Doctrine" के विकास को भी प्रेरित किया। पहलगाम हमले में, जिसमें भारत ने "Operation Sindoor" के साथ जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों और सैन्य हवाई अड्डों पर हमला किया, यह एक नई सीमा को दर्शाता है जहां भारत अब हमलावर को भारी कीमत चुकाए बिना आतंकी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा, जो पिछली संयम से आगे बढ़ रहा है।

मुख्य बिंदु

  • कारगिल युद्ध (1999) एक कड़वी सच्चाई थी, जिसने खुफिया चूक, उपकरण की कमी और सैन्य आधुनिकीकरण की आवश्यकता को उजागर किया।
  • कारगिल के बाद, भारत ने Defence Intelligence Agency (DIA) और National Technical Research Organisation (NTRO) जैसी नई खुफिया एजेंसियों की स्थापना की और National Security Council Secretariat का पुनर्गठन किया।
  • युद्ध ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, आधुनिक हथियार प्लेटफार्मों के अधिग्रहण और "Cold Start Doctrine" के विकास पर ध्यान केंद्रित किया।
  • हालिया पहलगाम हमला (2025) और भारत की जवाबी "Operation Sindoor" भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक नए, मुखर चरण को चिह्नित करते हैं, जो पिछली संयम के अंत का संकेत देता है।
  • "Make in India" पहलों द्वारा बढ़ाई गई भारत की सैन्य क्षमता अब आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों पर भारी लागत लगाने के लिए तैयार है।

परीक्षा तथ्य

  • कारगिल युद्ध 3 मई से 26 जुलाई, 1999 तक लड़ा गया था।
  • पहलगाम आतंकी हमला 22 अप्रैल, 2025 को हुआ था।
  • भारत की जवाबी कार्रवाई का नाम "Operation Sindoor" (7-10 मई, 2025) था।
  • Defence Intelligence Agency (DIA) की स्थापना 2002 में हुई थी, और National Technical Research Organisation (NTRO) की स्थापना 2004 में हुई थी।

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